सशक्त कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट इंदौर


Abstract


आज के आधुनिक समय में महिला सशक्तिकरण एक विशेष चर्चा का विषय है। हमारे आदि – ग्रंथों में नारी के महत्त्व को मानते हुए यहाँ तक बताया गया है कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:" अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते है। लेकिन विडम्बना तो देखिए नारी में इतनी शक्ति होने के बावजूद भी उसके सशक्तिकरण की अत्यंत आवश्यकता महसूस हो रही है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का अर्थ उनके आर्थिक फैसलों, आय, संपत्ति और दूसरे वस्तुओं की उपलब्धता से है, इन सुविधाओं को पाकर ही वह अपने सामाजिक स्तर को ऊँचा कर सकती हैं। राष्ट्र के विकास में महिलाओं का महत्त्व और अधिकार के बारे में समाज में जागरुकता लाने के लिये मातृ दिवस, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आदि जैसे कई सारे कार्य क्रम सरकार द्वारा चलाए जा रहे हैं। महिलाओं को कई क्षेत्र में विकास की जरुरत है।

भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाली उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरुरी है, जैसे – दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूणहत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, वैश्यावृति, मानव तस्करी और ऐसे ही दूसरे विषय। अपने देश में उच्च स्तर की लैंगिक असमानता है। जहाँ महिलाएँ अपने परिवार के साथ ही बाहरी समाज के भी बुरे बर्ताव से पीड़ित है। भारत में अनपढ़ो की संख्या में महिलाएँ सबसे अव्वल है। नारी सशक्तिकरण का असली अर्थ तब समझ में आयेगा जब भारत में उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें इसका बिल बनाया जाएगा कि वो हर क्षेत्र में स्वतंत्र होकर फैसले कर सकें।


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References


- कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट वार्षिक प्रतिवेदन 2016 - 17

- कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट वार्षिक प्रतिवेदन 2017 - 18

- साक्षात्कार -

• पद्मादीदी (ट्रस्ट सेविका, बाकाघर )

• निर्मला सिंह जी (प्राध्यापिका, कस्तूरबा ग्राम रूलर इंस्टीट्यूट)

• सुशीला दीदी (ट्रस्ट सेविका, कृषि क्षेत्र कस्तूरबा ग्राम)

• अभय आसवले (ट्रस्ट सेवक, कस्तूरबा पुस्तकालय)

- स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें

• दैनिक भास्कर

• पत्रिका

• नई दुनिया

- मेरे सपनों का भारत – लेखक महात्मा गांधी


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