सतत् विकास लक्ष्य एवं महिला सशक्तीकरण

संध्या बघेल, डाॅ. रश्मि श्रीवास्तव

Abstract


विश्व के सभी देशों में आज विकास के पथ पर एक-दूसरे से आगे निकल जाने की होड़-सी मची है, और इसके लिए औद्योगीकरण से लेकर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तक के हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। विकास की इस होड़ में हम यह भूल गए हैं कि, हम इसे किस मूल्य पर हासिल करना चाहते हैं। सतत् विकास एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है, कि भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं में भी कटौती न हों। यही कारण है कि सतत् विकास अपने शाब्दिक अर्थ के अनुरूप निरन्तर चलता रहता है सतत् विकास में सामाजिक एवं आर्थिक के साथ-साथ इस बात का ध्यान रखा जाता ह,ै कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।


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