काका कालेलकर के साहित्य में धार्मिक चिंतन

श्रीमती प्रीति डाॅ. पुष्पेन्द्र दुबे

Abstract


काका साहब के व्यक्तित्व को किसी भी एक साॅंचे में ढालना कठिन है। वे शिक्षक, शिक्षाषास्त्राी, पत्रकार, लोक शिक्षा के आचार्य, समाजशास्त्री, स्वातंत्रय सैनिक, गांधी विचार के भाष्यकार थे। जीवन के अनेक पहलुओं का उन्होंने गहराई के साथ चिंतन किया है एवं नये परिप्रेक्ष्य में इन्हें मौलिकता प्रदान की। काका साहब का चिंतक रुप अधिक उभरकर आया। उन्होंने जटिल से जटिल तत्वों का बिल्कुल सरल शब्दों में निरुपण किया। भारतवर्ष की आध्यात्मिक साधना जो वेद, उपनिषद, गीता, ब्रह्मसूत्र, संतसाहित्य और भक्ति साहित्य में विकसित हुई, उसी का पोषण काका साहब के व्यक्तित्व को मिला। काका साहब की निरंतर खोज उन्हें चिंतनात्मक क्षेत्र में काफी आगे लेकर गई। काका साहब कालेलकर का जीवनभर चिंतन चलता रहा तथा अपने चिंतन एवं जीवन के अनुभवों का निचोड़ उनके साहित्य में अभिव्यक्त हुआ। यह अनुभव हमारे समाज के लिये उपयोगी है। प्रस्तुत शोधपत्र में काका कालेलकर के साहित्य में धार्मिक चिंतन के विविध पहलुओं का अवलोकन किया गया है।

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काका कालेलकर ग्रंथावली, 4, जीवन दर्षन (धर्मोदय), सरोजिनी नाणावटी, यशपाल जैन, हसमुख व्यास, रवीन्द्र केलेकर, विष्णु प्रभाकर, कुसुम शाह, (संपादक मंडल), गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, नई दिल्ली

काका कालेलकर ग्रंथावली, 4, जीवन दर्षन (गीता का प्रेरक तत्व: जीवन योग), सरोजिनी नाणावटी, यषपाल जैन, हसमुख व्यास, रवीन्द्र केलेकर, विष्णु प्रभाकर, कुसुम शाह, (संपादक मंडल), गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, नई दिल्ली

काका कालेलकर ग्रंथावली, 4, जीवन दर्षन (परमसखा मृत्यु), सरोजिनी नाणावटी, यशपाल जैन, हसमुख व्यास, रवीन्द्र केलेकर, विष्णु प्रभाकर, कुसुम शाह, (संपादक मंडल), गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, नई दिल्ली

काका साहब कालेलकर, रवीन्द्र केलेकर, गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, नई दिल्ली


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